शीतला सातम (Sheetala Saptami 2025): पौराणिक रहस्य, शास्त्रीय महत्व और स्वास्थ्य से जुड़ी परंपराएँ

Sheetala Saptami 2025: शीतला सातम (शीतला सप्तमी) का उल्लेख विभिन्न हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर स्कंद पुराण, भविष्य पुराण, देवी भागवत पुराण और पद्म पुराण में मिलता है। जिसे विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से स्वच्छता, स्वास्थ्य और रोग निवारण से जुड़ा है। माता शीतला को संक्रामक रोगों की नाशिनी देवी माना गया है, और इस दिन उनकी पूजा कर लोग चेचक (गोटी), खसरा, ज्वर और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं

अब, मैं आपको विस्तृत पौराणिक संदर्भ और इससे जुड़ी कथाओं का वर्णन करूंगा।

Table of Contents

1. शीतला माता का पौराणिक उल्लेख (पुराणों में वर्णित विवरण) – Sheetala Saptami 2025

(i) स्कंद पुराण में शीतला माता

स्कंद पुराण में शीतला माता को रोगों की देवी के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें माता को गधे पर सवार, एक हाथ में झाड़ू और दूसरे हाथ में सूपड़ा (छलनी) लिए हुए दर्शाया गया है

  • झाड़ू का प्रतीक स्वच्छता है, जो यह दर्शाता है कि सफाई से बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • सूपड़ा हवा और भोजन को शुद्ध करने का प्रतीक है, जिससे हवा और भोजन को स्वच्छ रखा जा सके।
  • माता के अन्य हाथों में जल से भरा कलश और नीम की पत्तियां होती हैं, जो औषधीय गुणों से युक्त मानी जाती हैं।

इस ग्रंथ में कहा गया है कि जो व्यक्ति माता शीतला की पूजा करता है और स्वच्छता का पालन करता है, वह सभी प्रकार की महामारियों और संक्रमण से बचा रहता है

(ii) भविष्य पुराण में शीतला माता की कथा

भविष्य पुराण में शीतला माता को ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न किया गया बताया गया है। इसमें वर्णन आता है कि एक बार धरती पर भयंकर महामारी फैल गई थी, जिससे अनेक लोग पीड़ित हो गए

  • तब ब्रह्माजी ने माता शीतला को उत्पन्न कर आदेश दिया कि वे धरती पर जाकर लोगों को इन रोगों से मुक्त करें
  • माता शीतला ने अपनी शक्ति से संक्रामक रोगों को शांत किया और लोगों को बताया कि स्वच्छता और उनकी पूजा से ये रोग दूर हो सकते हैं
  • इस कारण से, शीतला माता को महामारी निवारण देवी के रूप में पूजा जाता है

(iii) देवी भागवत पुराण में शीतला माता की कथा

देवी भागवत पुराण में राजा वीरसिंह और उनके राज्य में फैली महामारी की कथा आती है।

  • राजा वीरसिंह के राज्य में अचानक चेचक और अन्य संक्रामक बीमारियां फैल गईं
  • अनेक वैद्यों और तांत्रिकों को बुलाया गया, लेकिन कोई उपाय काम नहीं आया।
  • एक दिन राजा को एक वृद्ध महिला मिली, जिसने उन्हें बताया कि यदि वे शीतला माता की पूजा करेंगे और बासी भोजन (ठंडा भोजन) का सेवन करेंगे, तो यह महामारी समाप्त हो जाएगी
  • राजा ने माता की पूजा करवाई और नियमों का पालन किया।
  • धीरे-धीरे रोग कम होने लगे और अंततः राज्य महामारी से मुक्त हो गया

इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि शीतला माता की पूजा और ठंडे भोजन का सेवन संक्रामक रोगों से बचने का उपाय माना जाता था।

(iv) पद्म पुराण में शीतला माता की पूजा विधि

पद्म पुराण में शीतला माता की पूजा के विस्तृत नियम बताए गए हैं। इसमें कहा गया है कि –

  1. इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. माता शीतला की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें और उनका पूजन करें।
  3. माता को ठंडे एवं बासी भोजन का भोग अर्पित करें।
  4. गुड़, दही, बाजरा, रोटी, ठंडी मिठाई (खीर, मालपुआ) आदि माता को अर्पित किए जाते हैं।
  5. पूजा के दौरान माता शीतला के निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए – “ॐ ह्रीं शीतलायै नमः
  6. पूजा के पश्चात कथा सुननी चाहिए और आरती करनी चाहिए
  7. इसके बाद, प्रसाद रूप में ठंडा भोजन ग्रहण करना चाहिए और दूसरों को भी बांटना चाहिए

2. शीतला सप्तमी बनाम शीतला सातम – राजस्थान और गुजरात में अंतर

(i) गुजरात की शीतला सातम (भाद्रपद मास)

  • यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है।
  • इस दिन बासी भोजन (ठंडा प्रसाद) जैसे खिचड़ी, बाजरे की रोटी, गुड़, दही और बेसन की मिठाइयाँ माता को चढ़ाई जाती हैं।
  • महिलाएँ सुबह जल्दी उठकर शीतला माता के मंदिर में पूजा करती हैं और ठंडे भोजन का भोग लगाती हैं।
  • गुजरात में इसे विशेष रूप से व्यापारियों और कृषक परिवारों द्वारा मनाया जाता है

(ii) राजस्थान की शीतला सप्तमी (चैत्र मास)

  • यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है (अधिकतर मार्च-अप्रैल में)।
  • राजस्थान में इसे बड़ी आस्था और भक्ति के साथ मनाया जाता है
  • यहाँ महिलाएँ हल्दी, मेहंदी और सुहाग सामग्री से माता शीतला का श्रृंगार करती हैं
  • शीतला माता के मंदिरों में विशेष मेले और भजन संध्याएँ आयोजित की जाती हैं
  • नीम के पत्तों का विशेष महत्व होता है, जो रोग निवारण में सहायक माने जाते हैं।
  • इस दिन अग्नि का प्रयोग वर्जित होता है, इसलिए एक दिन पहले भोजन पकाकर रखा जाता है

3. शीतला माता की पूजा से जुड़े अन्य नियम और परंपराएं – Sheetala Saptami 2025

Sheetala Saptami 2025 | Desh Ki Khabare
Image Credit: AI | Sheetala Saptami 2025 | Desh Ki Khabare

(i) इस दिन अग्नि का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता?

  • ऐसा माना जाता है कि इस दिन अग्नि के उपयोग से रोग बढ़ सकते हैं
  • बासी भोजन (ठंडा भोजन) ग्रहण करने से शरीर में शीतलता बनी रहती है और गर्मी से होने वाले रोग नहीं होते।
  • आयुर्वेद में भी यह कहा गया है कि गर्म भोजन की अधिकता से शरीर में उष्णता बढ़ती है, जिससे चेचक, फोड़े-फुंसी और अन्य संक्रमण बढ़ सकते हैं

(ii) शीतला माता का वाहन गधा क्यों है?

  • गधा एक ऐसा जीव है जो अस्वच्छता से प्रभावित होता है, लेकिन उसकी सहनशक्ति बहुत अधिक होती है
  • यह दर्शाता है कि जो लोग गंदगी और अस्वच्छता में रहते हैं, वे रोगों से घिर सकते हैं
  • इसलिए शीतला माता गधे पर विराजमान होकर यह संदेश देती हैं कि स्वच्छता आवश्यक है

(iii) नीम के पत्तों का महत्व

  • नीम के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और कई प्रकार के रोगों से रक्षा करते हैं।
  • शीतला माता की पूजा में नीम की पत्तियों का उपयोग किया जाता है, जिससे वातावरण शुद्ध रहता है

4. शीतला माता की प्रचलित आरती – Sheetala Saptami 2025

Sheetala Saptami 2025 | Desh Ki Khabare
Image Credit: AI | Sheetala Saptami 2025 | Desh Ki Khabare

॥ जय शीतला माता ॥
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
अपने भक्तों की, दुःख हरती हो माता॥

नीम पत्तों की माला, सिर पर शोभित माता।
जल से रोग नाश कर, सुख बरसाती माता॥

जो कोई तेरा भजन करे, सुख-सम्पत्ति पाए।
सब संकट कट जाते, जीवन सफल हो जाए॥

5. शीतला माता के प्रमुख मंदिर

(i) गुजरात के प्रसिद्ध मंदिर

  • शीतला माता मंदिर, अहमदाबाद
  • शीतला माता मंदिर, सूरत

(ii) राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिर

  • शीतला माता मंदिर, जयपुर
  • शीतला माता मंदिर, अलवर

निष्कर्ष – शीतला माता का सही महत्व – Sheetala Saptami 2025

Sheetala Saptami 2025: शीतला सातम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य-संबंधी परंपरा भी है। इसके पीछे वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण भी हैं, जो हमें स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सीख देते हैं।

पुराणों के अनुसार –

  1. शीतला माता की पूजा करने से संक्रामक रोगों से बचाव होता है।
  2. इस दिन ठंडा भोजन ग्रहण करने से शरीर में संतुलन बना रहता है।
  3. स्वच्छता और नीम जैसी औषधियों का उपयोग रोग निवारण में सहायक होता है।
आप सभी को शीतला सातम की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Desh Ki Khabare

मेरा नाम Manish Upadhyay है। मैं पिछले दो सालों से ब्लॉगिंग के क्षेत्र में काम कर रहा हूं। इसके साथ ही मैं UI/UX Desinger and WordPress Developer भी हु. मैं "देश की खबरें" वेबसाइट में ब्लॉग राइटिंग करता हु जहां हम मनोरंजन, त्योहार, शेयर बाजार, आध्यात्म, खेल, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण विषयों और उससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां हिंदी में देते हैं ।

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